Aabhar Yoga Hindi
'“आभार योग” अनुशासन और समर्पण की एक ऐसी जीवन शैली है, जिसमें शरीर, श्वास और मन के मध्य पूर्ण सामंजस्य स्थापित कर इष्टतम स्वास्थ्य एवं आंतरिक संतुलन प्राप्त किया जाता है। यह मानसिक वृत्तियों के गहन स्तरों: संस्कारों, विश्वासों, अभिघातों, प्रवृत्तियों, धारणाओं, प्रतिक्रियाओं और विचारों के निरंतर प्रवाह से ऊपर उठकर स्वयं के श्रेष्ठतम स्वरूप की ओर विकसित होने की एक सुसंगठित विधि है ।
इस पथ में संतुलित जीवन, आंतरिक–बाह्य स्वास्थ्य, और योग की उच्चतम अवस्था की प्राप्ति हेतु एक जागरूक दिनचर्या अपनाई जाती है, जिसमें नैतिक सिद्धांतों, उचित आहार एवं जल सेवन, तथा दैनिक अभ्यासों में आसन, मुद्रा, प्राणायाम, योगनिद्रा और ध्यान का समावेश होता है ।
दैनिक योगाभ्यास के प्रारंभिक चरण में विन्यास योग की शैली में शक्तिशाली नमस्कार अनुक्रमों का एकाग्र अभ्यास किया जाता है, जहाँ आसनों को श्वास की लय के साथ जोड़कर एक से दूसरे में सहज प्रवाह होता है। इसके पश्चात विविध आसन, प्राणायाम, मुद्रा, योगनिद्रा और ध्यान को दीर्घकाल तक साधा जाता है। इस प्रकार, एक–एक कर बीस विन्यास अनुक्रमों के प्रत्येक क्रम में निपुणता प्राप्त कर साधक जीवन के विविध तत्वों एवं आयामों को भीतर जागृत करता है, और उनके साथ एकात्मता की अनुभूति करता है ।
प्रत्येक अनुक्रम में पूर्ववर्ती क्रम, परवर्ती की नींव एवं आधार होता है, जैसे सूर्य नमस्कार से प्रारंभ होकर, उन्नत सूर्य नमस्कार, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, देह नमस्कार इत्यादि। यह केवल शारीरिक अभ्यास नहीं है, अपितु इनके माध्यम से हम माँ प्रकृति तथा जीवन के मूल तत्वों एवं पक्षों से प्रार्थना कर चित्त को शुद्ध करते हैं, और जागरूकता के साथ उनसे जुड़ते हुए अंततः परमात्मा से एकत्व की अपरोक्षानुभूति प्राप्त करते हैं ।
जो साधक आभार योग की जीवन शैली को श्रद्धा, निरंतरता और आत्म-निष्ठा से जीता है, वह न केवल शारीरिक और मानसिक उत्कर्ष प्राप्त करता है, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संतुलन, श्रेष्ठता और आनंद का अनुभव करता है ।
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